नववर्ष

फिर लौट आएँगे हमनए रंगो-लिबास मेंहमारे लफ़्ज़ों से तुमहमको पहचान जाओगे गर भूलना चाहो तोकोई ग़म भी नहीं हैपर इतना तो यकीं है किहमें फिर गुनगुनाओगे ~काव्याक्षरा

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#विचारों_की_गरिमा

सुनते आए हैं बरसों सेचिंता चिता समान हैक्या चिंताएँ पीछे छोड़जी पाए इंसान हैं चिंता में जो चिंतन होतातो करना भी वाज़िब थामनन आकलन नहीं हुआ तोकरना कहाँ मुनासिब था… ~Kavyakshra https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=pfbid04T9VgviBBtB6ngmmcjyzUSjdwXqLPUbn2HtAtdihn8os3ym814BRFasebtLjcivul&id=100065217301359&mibextid=Nif5oz

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प्रतीक्षा अंतहीन

विनम्र निमंत्रण था तुम्हेंप्रिय! हृदयागमन हेतु तुम्हारी अस्वीकृति से मैंनिस्तब्ध हो गया हूँ प्रतीक्षा करने से भी प्रस्तरकदाचित पुष्प बनते हों तो जीवन के अंतिम क्षणों तकमैं निश्शब्द हो गया हूँ…✍️ kavyakshra https://www.facebook.com/100006952836416/posts/pfbid02aJ1vrYxyeG5aGNTk4ESYcYgyCtwVTUsxt9uxWCDeEYGRS48BtP2qekZ1b1vBd4o4l/?mibextid=Nif5oz

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अनेक मामलों में, ये जो चाहत होती है न, जिनसे होती है उनसे ही छिपा ली जाती है! आजकल के पति-पत्नी की बात छोड़ दीजिए , वे तो जगज़ाहिर रोमांटिक कपल होते हैं! मगर हम जैसे पुराने पति-पत्नी…. हम तो वो चीज़ हैं कि एक दूसरे पर मर मिटेंगे पर जताएंगे बिल्कुल भी नहीं!

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विचारों की गरिमा

आवश्यकता निश्चित हीभावनाओं केअनुमोदन से अधिकनियमों के अनुसरण की होती हैजीवन के आदर्शयदि सहर्ष ठुकरा दिए जाएँतो भावनाएँनिरंकुश-निराधार फिरती हैं…✍️ काव्याक्षरा

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विचारों की गरिमा

अब इंतज़ार किस चिड़िया का नाम है भई! सामान्य बातचीत भी फोन के ज़रिए हो जाया करती है,और झगड़े के चांसेज शून्य के बराबर होते हैं जो अलग!     वैसे भी जो ‘आई लव यू’ सामने से कहना मुमकिन नहीं हुआ वही फोन पर मैसेज के साथ ‘दिल’❤️ चिपका देना कितना आसान हो गया है।    देखा […]

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कहिए पतिदेव…

उफ्फ़! कितना झूठा होता है एक पत्नी का नाराज़ होना और कितना नकली होता है उसका बेबात रूठ जाना!यहाँ गौरतलब ये कि नाराज़ कोई भी हो,अंत में रूठती तो पत्नी ही है,गलती किसी की भी हो,पत्नी को बेहतर तरीके से उसमें पति की गलती ढूँढ़कर रूठना आता है… kavyakshra https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=pfbid02DkxvTjEPFiG7NQayoz1weqwCQrMxMtDP5PR5SriJryeatagUKrJSpSVBYHZBu7S9l&id=100065217301359&mibextid=Nif5oz

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