ज़िंदगीऔरमैं

बातनहींकरते

कुछ बात दरमियां है
अब हमारे-तुम्हारे
क्यों एक दूसरे से
अब हम बात नहीं करते…

बातों के जवाब बातें
बस बात बढ़ गई
फिर बात कम हुई
अब हम बात नहीं करते…

वो बात क्या हुई जो
बात इतनी बन गई
फिर बात ऐसी बिगड़ी
अब हम बात नहीं करते…

यूँ बातों-बातों में
कोई बात थी मगर
लो बात ही बेबात
अब हम बात नहीं करते…

कुछ बात करते तो
हर बात सुलझ जाती
किसी बात पर अटके
अब हम बात नहीं करते…

तुमसे बात करने की
एक हसरत रही हमारी
कभी फुरसत में आओ
क्यों हम बात नहीं करते… ✍️

काव्याक्षरा

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