#लेखिका…

लेखिका होना भी
कुछ सरल नहीं, मित्रो!
विचारों की उधेड़बुन में
योग्यताओं के
समीकरण बदल जाते हैं…!!!

पहले कहाते थे विशेषज्ञ
पाक-कला के हम भी कभी
आज खाना जल जाने पर
निरे लापरवाह कहे जाते हैं ….!!!

यूँ तो सुघड़ गृहणी का
किरदार भी बखूबी निभाया हमने
पर लिखने के जुनून में आज
ज़रूरी काम भूल जाते हैं…..!!!

व्यवस्थाओं के ताने-बाने से
अब सोच भी मेल नहीं खाती
हर पल जो विचार बनते हैं
तो बाकी काम बिगड़ जाते हैं….!!!

एक समय था जब व़क्त की
पाबंदी की मिसाल हम थे
आज लिखने के जोश में
व़क्त का होश नहीं रख पाते हैं….!!!

हम मग्न रहते हैं खुद में
तो किसी की परवाह नहीं होती
अब अपनों की उम्मीदों पर

हम खरे नहीं उतर पाते हैं….!!!

#काव्याक्षरा

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7 thoughts on “#लेखिका…

  1. आपकी हिंदी बहुत अच्छी है! पिजाजी का सायकल पर सब्जी उतार कर काम अच्छा है! भाई सब चुप चाप बैठ ते थे !अच्छी बात है! शुभकामनाये! शुभकामनाए!

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  2. पहले सुनना चाहिए|बात में अपना सुनाना चाहिए| आपको मराठी समझ में आती है| आपने मेरा ब्लॉग पढ़ा है| इसलिए पुच्छती है|

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