#गुज़ारिश

क्या आरज़ू है दिल की
क्यों ख़फा-ख़फा से हम हैं… !
हुई चाहतें जो पूरी
क्या वो भी कोई कम हैं… !!!

क्या-क्या है मिला हमको
कभी गौर भी फ़रमाया… !
जो पा न सका ये दिल
बस मन वहीं अटकाया… !!!

यह ज़िंदगी नियामत
एहसान में मिली है… !
बन जाए खुशनुमा ग़र
तबीयत खिली-खिली है…!!!

है वक्त की गुज़ारिश
क्यों ग़मज़दा से हम हैं… !
ज़िंदादिली से जीने के
मौके भी कोई कम हैं… !!!

ये ज़हन का है मसला
जो सोच बदल जाए… !
खुशियाँ ज़माने भर की
दामन में बिखर आए… !!!

कुछ पा लिया या ना फ़िर
ज़्यादा फ़र्क नहीं है… !
जो व़क्त पास अपने
बस कीमती वही है… !!!

खोने को बहुत कुछ है
पर ध्यान में भी यह हो… !
जज़्बात मिल्क़ियत हैं
और घायल ज़मीर न हो… !!!

कैसे गुज़ारे हमने
ये ज़िंदगी के लम्हे… !
बस मायने हैं इसके
बने कौन दिल से अपने… !!!

होता है मन मुताबिक़
ग़र दिल में जो रहम है… !
दौलत ‘सुकून ए दिल’ है
बस दुआ में ही ‘दम’ है… !!!

#काव्याक्षरा
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2 thoughts on “#गुज़ारिश

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