#कुछ_नहीं

अनेक अर्थों को समेटे उसका मुझसे “कुछ नहीं” कहना मेरे मासूम दिल को एक बारगी झकझोर जाता है… मैं समझ नहीं पाता कि कुछ कहना है अभी बाकी या कि सुनने की आदत वो अभी कुछ और चाहता है…✍️ #काव्याक्षरा

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#सादगी

अपरिग्रह का भाव सर्वोत्तम जीवन-शैली है विलासिता ने व्यर्थ में सुख-शांति भी ले ली है अति देखकर हृदय में अतिक्षोभ होता है मैं संतोषी-जीव मुझे यूँ क्रोध होता है कम हो तो हृदय को शिकायत नहीं है आवश्यकता से अधिक की कोई चाहत नहीं है✍️ #काव्याक्षरा ***************

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#प्रियतम

जो सहला दे मन को दृष्टि मात्र में हौले से बिना आहट के साँसों की गरमाहट में शोले से जो एहसासों की डोर से मनतरंग कर दे बेनूर अनमने ख्याल में मुसकान के रंग भर दे पल राहत के, दे चाहत से वही मनमीत हृदय का है जो हर पल साथ रहे वही तो रंग […]

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तुम वो हो! जो मन में खुशबू-सी भर गई एक महक ज़िंदगी में अचानक बिखर गई नज़रों की रहगुज़र से तुम दिल तक पहुँच गई मीठी-सी चुभन बनकर सिरहन-सी कर गई नज़रों में फ़कत रहने की एक इल्तज़ा की हमने तुम दिलो-जिगर के पार आँसुओं में ढल गईं… #काव्याक्षरा #ज़िंदगी_और_मैं

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#रंग

ज़िंदगी की मुकम्मल तस्वीर को हरगिज़ जज़्बात से सराबोर हर रंग चाहिए…. वफ़ा का खफ़ा का इश्क का तन्हाई का दर्द का खुशी का मिलन का जुदाई का…✍️ #काव्याक्षरा

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ज्ञान

ज्ञान के विस्तार के साथ अहंकार या वैराग्य जिस प्रकार पल्लवित होने लगते हैं उसी प्रकार ज्ञान के प्रकाश में अहंकार विलीन हो जाता है और वैराग्य प्रस्फुटित ✍️ #विचारों_की_गरिमा

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#मिजाज़

लिखना भी दिल्लगी है गर एवज़ में ग़म रखो क्यों न खुशदिली से ज़िंदगी के मिजाज़ को लिखो… कुछ खट्टे वाकये या मीठी-सी चुभन कुछ यादें कडवी-सी या बुझाबुझा-सा मन… न दिल में कश्मकश की उलझनें रखो मुसकराहट महँगी है इसे होठों पर रखो… kavyakshra

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सपनों की उड़ान

जीवनांक – 1 जीवन में सपनों का अपना महत्त्व है क्योंकि हम जो खुली आँख से सपने देखते हैं उसी के जैसा अपने जीवन को बनाना चाहते हैं।मगर सहूलियत के दायरों में रहकर हम यह कार्य नहीं कर सकते। इसलिए अपनी योग्यताओं को सपनों के अनुरूप विकसित करना हो तो विफलताओं से डरना व्यर्थ है […]

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#क्षण

स्मृति में संजोए रखिए मात्र सुखद क्षण जीवन की लय को अनुभूत करते क्षण प्रेम को हृदय में स्थापित करते क्षण संयोग के कुछ सुंदर अकल्पनीय क्षण…✍️ #काव्याक्षरा

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अलवर

मेरा शहर मुझे बहुत याद आता है उसका हर गली-बाज़ार तक मन को भाता है… प्रकृति की मेहरबानी है इस कदर इस पर, हर पहाड़ खूबसूरत अरावली कहलाता है… नज़ारे हैं इतने कि देखते जाएँ मेरे शहर का ज़िक्र महाभारत में आता है… पुरानी इमारतों और हरियाली का मंज़र मेरे शहर को अलग मुकाम पर […]

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