शब्द आपके🌸 रसमय आवरण में लिपटे छद्म आक्रामक हृदय पर अधिकार करने की मुद्रा में प्रयासरत रहते हों चाहे! परंतु सत्य तो ये है कि अविजित हृदय मेरा किसी भी आकर्षण की परिधि से सदैव ही बाहर रहा है आर्यपुत्र•••✍️ काव्याक्षरा

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हमारी शख़्सियत ने हमकोवो इत्मिनान बख़्शा हैहम फ़क्र से जीते हैंकोई फ़िक्र नहीं करते… मिज़ाज-ए-व़क्त हो हरगिज़ सख़्त भी कितना ही चाहेहम हौसले से उसकाऐतमाद करते हैं…✍️#kavyakshra

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विचारों की गरिमा

सत्य से सवाल करनेवालों से सच जिस दिन प्रतिप्रश्न करेगा मुँह छिप रहे होंगे हथेलियों में झूठ दूर खड़ा ताक रहा होगा हृदय पश्चात्ताप कर रहा होगा  सच तब भी मुसकरा रहा होगा #kavyakshra

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नज़रों से गुनगुनाकरजो नई धुनेंतराशते हैं 🎶 वो अनजाने चेहरोंमें उल्फ़ततलाशते हैं 💕 अपनों में जिनकोबस ऐबही दिखते हैं 👀 वो ग़ैरों की ख़ातिरबेकीमतबिकते हैं•••✍️ #kavyakshra

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नींद के आगोश में जबसो जाता है आदमी कुछ घंटों की मौत यूँमर जाता है आदमी जो दिनभर मशीन बनाइतराता है आदमी इस तरह हरदिन मरकररात जी जाता है आदमी✍️ kavyakshra

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विचारों की सर्वोच्च श्रेणी में स्थान पाने से लेकर उसके शिखर पर बने रहना ही मेरे ‘विचारों की गरिमा’ है!✍️ kavyakshra

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कोई भी विचार सितारा ऐसे ही नहीं बनता! विचारों के नक्षत्र बनने के क्रम में उनकी अस्थिरता छूटते ही वे स्थायित्व की ओर बढ़ जाते हैं और सितारा बन जाते हैं । ✍️ kavyakshra

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चलो! मना लेंखुद ही खुद कोएक अरसे सेरूठे हुए हैं हम बेवजह उन्हेंपरेशान क्या करनाबेवजह क्यों पालकररखे जाएँ ग़म… ✍️ #kavyakshra

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विचारों की गरिमा

सृष्टि में वैविध्यता के मध्य भी••• देह की दुविधा है कियौवन को सहेज नहीं सकती नियति के आयुक्रम सेपरहेज कर नहीं सकती यद्यपि प्रकृति में निस्तारण की••• सुविधा न होती तोयही देह मुक्ति को भटकती अनंत काल तक जीवनको अनिच्छित ढोती… ✍️ #kavyakshra_____________________

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